अक्सर जब हम मतलब जब भी हम न्याय अपराध या सजा के बारे में सोचते हैं तो हमारे दिमाग में एक बहुत ही साफ और भौतिक तस्वीर आती है बिल्कुल जैसे कंक्रीट की जेल हो गई पुलिस की हथकडियां हो गए या फिर एक जज जो अपना फैसला सुनाता है तो सब कुछ कागजों पर बैठे में लिखा होता है हाँ एक ऐसी व्यवस्था जिसे वह अपनी आंखों से देख सकते हैं जो इंसानों के बनाए नियमों पर चलती है बिल्कुल लेकिन यह जो हमारे भौतिक न्याय प्रणाली है ना यह एक बहुत ही सीमित दायरे में काम करती है मतलब यहां सजा के एक तय सीमा होती है कुछ साल या कुछ महीने दीवारें ईंट और पत्थर की होती है और अगर कोई बहुत चालाक इंसान हो तो शायद वह इन दीवारों से या इस पूरी व्यवस्था से बचकर निकल भी सकता है सही का विजन आज हम जिस विषय पर गहराई से अध्ययन करने वाले ना वहां बचने का कोई रास्ता नहीं बिल्कुल नहीं धर्मशास्त्रों पर की गई ऐतिहासिक रिसर्च और इन प्राचीन ग्रंथों पर आधारित कई विश्लेषणात्मक लेख भी शामिल है हाँ और इन सभी स्रोतों को एक साथ रखकर आज हम पूरी तरह से सिर्फ धार्मिक सजाओं की दुनिया का विश्लेषण करेंगे बिल्कुल और इस विस्तृत चर्चा का मुख्य उद्देश्य है या कह लें जो मिशन है वह यह समझना है कि मौत के बाद आत्मा का सफर नरक की यह खौफनाक यातनाएं और धरती पर प्रायश्चित के नियम आखिर क्यों बनाए गए वे सबसे बड़ा सवाल मतलब मैं सोच रही थी कि क्या इन भयानक सजाओं का मुख्य उद्देश्य सिर्फ प्राचीन समाज को खौफ के जरिए कंट्रोल में रखना था या फिर आत्मा को उस कचरे और पाप से मुक्त करना था जो इंसान जीवन भर इकट्ठा करता है
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