परिसीमन विधेयक और भारतीय राजनीतिक-आर्थिक संरचना पर इसके व्यापक प्रभाव: एक विस्तृत शोध रिपोर्ट
परिसीमन विधेयक और भारतीय राजनीतिक-आर्थिक संरचना पर इसके व्यापक प्रभाव: एक विस्तृत शोध रिपोर्ट प्रस्तावना किसी भी परिपक्व और विकासशील लोकतंत्र में, प्रतिनिधित्व की समान और आनुपातिक व्यवस्था उसकी वैधता, स्थिरता और सुशासन का मूल आधार होती है। "एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य" (One person, one vote, one value) का लोकतांत्रिक और संवैधानिक सिद्धांत यह सुनिश्चित करता है कि संसद या राज्य विधानसभाओं में निर्वाचित जनप्रतिनिधि लगभग समान जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करें। इस वैधानिक और भौगोलिक समतुल्यता को धरातल पर उतारने की निरंतर प्रक्रिया को 'परिसीमन' (Delimitation) कहा जाता है। भारत जैसे विशाल, अत्यधिक विविधतापूर्ण और जटिल संघीय ढांचे वाले देश में, परिसीमन केवल निर्वाचन क्षेत्रों की भौगोलिक सीमाओं को फिर से खींचने की एक तकनीकी या प्रशासनिक प्रक्रिया मात्र नहीं है। इसके विपरीत, यह एक अत्यंत जटिल, दूरगामी और राजनीतिक रूप से संवेदनशील कवायद है, जो यह तय करती है कि देश की सत्ता का भावी संतुलन किन राज्यों, क्षेत्रों और जनसांख्यिकीय समूहों की ओर झुकेगा। भारतीय संविधान के लागू होने के बाद...
